
नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि भारत वर्तमान में खेलों के स्वर्णिम काल से गुजर रहा है और इतिहास इस बात को हमेशा याद रखेगा कि हम अब क्या कदम उठाते हैं। एक प्रमुख खेल समिट में बोलते हुए उन्होंने भारतीय एथलीटों की वैश्विक सफलताओं को रेखांकित किया।
ओलंपिक से लेकर कॉमनवेल्थ गेम्स तक, भारत ने अभूतपूर्व उपलब्धियां हासिल की हैं। ‘यह हमारा समय है,’ मांडविया ने जोर देकर कहा, और हितधारकों से बुनियादी ढांचे व प्रतिभा विकास में भारी निवेश की मांग की। नीरज चोपड़ा और पीवी सिंधु की कहानियां इसके जीते-जागते प्रमाण हैं।
मंत्री ने भविष्य की रूपरेखा पेश की, जिसमें वित्तीय सहायता, विश्वस्तरीय प्रशिक्षण केंद्र और ग्रामीण स्तर के कार्यक्रम शामिल हैं। ‘हमको इस गति को बनाए रखना होगा। दुनिया देख रही है, इतिहास हमारी अगली चालें नोट करेगा।’
विशेषज्ञ सहमत हैं। विश्लेषकों का कहना है कि पिछले दशक में पदक संख्या दोगुनी हुई है, लेकिन निरंतरता के लिए प्रणालीगत बदलाव जरूरी हैं। ग्रामीण खेल सुविधाओं की कमी और डोपिंग जैसी चुनौतियां बाकी हैं, फिर भी उत्साह व्याप्त है।
मांडविया का विजन सार्वजनिक-निजी साझेदारी पर आधारित है, जो देश के हर कोने से प्रतिभा को निखारेगा। 2028 ओलंपिक की नजर में, उनके शब्द खेल क्रांति का बिगुल हैं जो भारत की वैश्विक छवि बदल सकते हैं।