
भारतीय रेलवे ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। इस वर्ष सामान्य और नॉन-एसी कोचों के उत्पादन में अब तक का रिकॉर्ड तोड़ दिया गया है। यह सफलता यात्रियों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी।
कपूरथला, पेरंबूर और रायबरेली के प्रमुख कोच फैक्ट्रियों ने इस उत्पादन में अग्रणी भूमिका निभाई। हजारों अतिरिक्त कोच असेंबली लाइनों से बाहर आ चुके हैं। इससे छोटी दूरी की ट्रेनों में अर्थव्यवस्था श्रेणी के यात्रा विकल्पों की कमी दूर हुई है।
रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘यह करोड़ों यात्रियों के लिए क्रांति लाएगा।’ स्वदेशी उत्पादन पर जोर देकर आयात पर निर्भरता कम हुई और स्थानीय रोजगार बढ़ा।
सामान्य कोचों का उत्पादन सबसे अधिक रहा, जिसमें पिछले तिमाही में 5,000 से ज्यादा यूनिट बने। नॉन-एसी स्लीपर और सिटिंग कोच भी तेजी से तैयार हुए।
आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों को पार करने के लिए विक्रेताओं से साझेदारी और तकनीकी उन्नयन किया गया। नए कोचों में आधुनिक ब्रेकिंग सिस्टम और अग्निरोधी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है।
भविष्य में उत्पादन को और बढ़ाने की योजना है। त्योहारों और पर्यटन की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए यह कदम रेल नेटवर्क को मजबूत बनाएगा।
भारतीय रेलवे राष्ट्र की धमनी बनी रहेगी, जो हर वर्ग तक सस्ती यात्रा पहुंचाएगी।