
भारत की कर वसूली आने वाले वित्तीय वर्ष में उछाल की उम्मीद के साथ है, जो आगामी केंद्रीय बजट में राजकोषीय समेकन को मजबूत आधार देगी। एक ताजा रिपोर्ट में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों में तेजी की बात कही गई है, जो आर्थिक सुधार और अनुपालन में बेहतरी से प्रेरित है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि शुद्ध कर प्राप्तियां दहाई अंकों में बढ़ेंगी। जीएसटी संग्रह लगातार 1.5 लाख करोड़ रुपये मासिक से ऊपर पहुंच रहा है, जबकि आयकर रिटर्न रिकॉर्ड स्तर पर हैं। यह राजस्व सरप्लस महत्वपूर्ण मोड़ पर आया है, जहां सरकार पूंजीगत व्यय और घाटा नियंत्रण के बीच संतुलन बना रही है।
राजकोषीय समेकन भारत की मैक्रोइकॉनॉमिक रणनीति का मूल आधार है। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, केंद्र सरकार ने घाटे को जीडीपी के 9.2% से घटाकर 5.9% तक लाने का लक्ष्य हासिल किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रुख बजट में जारी रहेगा, जिसमें मध्यम अवधि में ऋण-जीडीपी अनुपात 60% से नीचे रखने पर जोर होगा।
मुख्य कारक कर प्रशासन का डिजिटलीकरण, आधार विस्तार, और महामारी के बाद अर्थव्यवस्था का औपचारिकीकरण हैं। कॉर्पोरेट टैक्स कटौती निवेशों को बढ़ावा दे रही है, जो शेयर बाजार और एफडीआई में दिख रहा है।
चुनौतियां बरकरार हैं। कृषि आय पर छूट राजस्व को सीमित करती है, जबकि उच्च मूल्य क्षेत्रों में चोरी रोकनी होगी। रिपोर्ट में छूटों का तर्कसंगतकरण और एआई आधारित ऑडिट बढ़ाने की सिफारिश की गई है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपने छठे बजट की तैयारी में हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर, हरित ऊर्जा और सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए आवंटन पर नजर है। राजकोषीय अनुशासन से भारत की सॉवरेन रेटिंग मजबूत होगी।
संक्षेप में, बढ़ते कर राजस्व भारत के राजकोषीय ढांचे की मजबूती दर्शाते हैं। निरंतर समेकन आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करेगा।