
भारत और रूस के बीच मजबूत रणनीतिक साझेदारी को नया आयाम देते हुए दोनों देशों ने समुद्री सहयोग का ऐतिहासिक समझौता किया है। इस pact से आर्कटिक और हिंद महासागर में नई व्यापारिक गलियों का निर्माण होगा, साथ ही जहाज निर्माण उद्योग को अपार बढ़ावा मिलेगा।
उच्च स्तरीय बैठकों में तैयार इस समझौते का केंद्रबिंदु संयुक्त रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों का विकास है। रूस की आर्कटिक नेविगेशन विशेषज्ञता और भारत के रणनीतिक बंदरगाहों का मेल वैश्विक व्यापार को तेज करेगा।
जहाज निर्माण क्षेत्र में यह साझेदारी क्रांतिकारी साबित होगी। गुजरात और महाराष्ट्र के शिपयार्ड रूसी डिजाइनों से लैस होकर आइस-क्लास जहाज बनाएंगे। इससे दोनों देशों में रोजगार और निर्यात बढ़ेगा।
विश्लेषकों का अनुमान है कि पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार 30 प्रतिशत उछलेगा। ऊर्जा, उर्वरक और रक्षा सामग्री का परिवहन सस्ता व तेज होगा। सुेज नहर जैसी संकटग्रस्त जगहों पर निर्भरता कम होगी।
पर्यावरण संरक्षण और तकनीकी हस्तांतरण पर विशेष जोर दिया गया है। संयुक्त प्रशिक्षण और प्रोजेक्ट्स से यह साझेदारी मजबूत बनेगी। भारत-रूस का यह कदम वैश्विक व्यापारिक परिदृश्य को नया आकार देगा।