
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में भारत की खुदरा मुद्रास्फीति दर 1.33 प्रतिशत पर आ गई, जो नवंबर के 1.67 प्रतिशत से काफी कम है। यह आंकड़ा उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है और आर्थिक सुधार के संकेत देता है।
खास बात यह है कि खाद्य मुद्रास्फीति सातवें लगातार महीने नकारात्मक जोन में बनी हुई है, जो -1.53 प्रतिशत पर रही। सब्जियों के दामों में 16.85 प्रतिशत की भारी गिरावट आई, जबकि दालें और फल भी सस्ते हुए। अच्छी फसल और बेहतर आपूर्ति श्रृंखला इसका श्रेय है।
ईंधन और प्रकाश की महंगाई 0.21 प्रतिशत पर रही, जबकि आवास लागत में 2.87 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी हुई। ग्रामीण इलाकों में मुद्रास्फीति 1.01 प्रतिशत रही, जो शहरी क्षेत्रों के 1.83 प्रतिशत से कम है।
आरबीआई के लिए यह आंकड़ा सकारात्मक है, जो ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश बढ़ाता है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह स्थिरता विकास को गति देने में मदद करेगी। आगे के महीनों में मौसम या वैश्विक कारकों से चुनौतियां रह सकती हैं, लेकिन वर्तमान ट्रेंड आशावादी है।