
भारत ने नीले अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। अंडमान सागर में देश की पहली ओपन-सी समुद्री मछली पालन परियोजना का उद्घाटन कर दिया गया है। यह परियोजना समुद्री संसाधनों का टिकाऊ उपयोग सुनिश्चित करेगी और पारंपरिक मछली पकड़ने पर निर्भरता कम करेगी।
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के स्वच्छ जल में उन्नत केज फार्मिंग सिस्टम स्थापित किए गए हैं। कोबिया और पॉम्फ्रेट जैसी उच्च मूल्य की मछलियों का पालन होगा। मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि इससे हजारों रोजगार सृजित होंगे और निर्यात बढ़ेगा।
चक्रवात प्रतिरोधी फ्लोटिंग केज का उपयोग हो रहा है, जो वर्ष भर संचालन सुनिश्चित करेंगे। शुरुआती चरण में 50,000 मछली के अंगुलों का स्टॉकिंग किया गया है। तीन वर्षों में 1,000 टन से अधिक उत्पादन का लक्ष्य है। नॉर्वे और चिली की तकनीक को भारतीय जलवायु के अनुरूप ढाला गया है।
पर्यावरण संरक्षण प्राथमिकता है। जल गुणवत्ता, जैव विविधता और मछली पलायन रोकथाम की कड़ी निगरानी होगी। 2025 तक 10 अरब डॉलर के जलीय कृषि निर्यात लक्ष्य से यह जुड़ती है। स्थानीय मछुआरों को प्रशिक्षण देकर समावेशी विकास सुनिश्चित किया जा रहा है।
जंगली मछली भंडार घटने के बीच यह खाद्य सुरक्षा के लिए क्रांतिकारी साबित होगी। 18 माह में पहली फसल आने की उम्मीद है।