
भारत और जर्मनी के बीच आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाते हुए द्विपक्षीय व्यापार 50 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है। इसी कड़ी में दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं, जो उनके साझा भविष्य की मजबूत नींव रखते हैं।
इन समझौतों में नवीकरणीय ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण, डिजिटल तकनीक और कौशल विकास जैसे क्षेत्र प्रमुख हैं। जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज की हालिया भारत यात्रा के दौरान हुए उच्च स्तरीय द्विपक्षीय संवादों में ये एमओयू अंतिम रूप दिए गए। दोनों नेताओं ने वैश्विक चुनौतियों के बीच सतत विकास पर जोर दिया।
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारत-जर्मनी व्यापार लगभग 52.3 अरब डॉलर तक पहुंचा, जो पिछले वर्षों से उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। भारत से जर्मनी को दवाएं, कपड़ा और ऑटो पार्ट्स का निर्यात 15 प्रतिशत बढ़ा, जबकि जर्मनी से मशीनरी, रसायन और वाहनों का आयात बढ़ा।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की वार्ता और जर्मनी की सप्लाई चेन विविधीकरण रणनीति इस उछाल के पीछे प्रमुख कारक हैं। सिएमेंस, बोश और फॉक्सवैगन जैसी जर्मन कंपनियां भारत में विस्तार की घोषणा कर चुकी हैं।
भविष्य में दोनों देश 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखे हैं। यह साझेदारी न केवल आर्थिक प्रगति को गति देगी, बल्कि तकनीकी आदान-प्रदान और रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलेगा। ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत के विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरने में जर्मनी की इंजीनियरिंग क्षमता महत्वपूर्ण साबित होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन अधिकारियों की उपस्थिति में हुए हस्ताक्षर समारोह ने सहयोग के नए युग की शुरुआत का प्रतीक चिह्नित किया। जलवायु परिवर्तन जैसी साझा समस्याओं के समाधान के लिए ये समझौते रास्ता प्रशस्त करेंगे।