
भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षाओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नवीडिया के साथ जीपीयू निर्माण को लेकर महत्वपूर्ण वार्ता की। ये चर्चाएं हाल ही में हुईं, जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों के बीच भारत को चिप उत्पादन का वैश्विक केंद्र बनाने की कोशिश को रफ्तार दे रही हैं।
सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और रेल मंत्रालय संभालने वाले वैष्णव ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटरों और हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग के लिए जीपीयू की रणनीतिक अहमियत पर जोर दिया। दुनिया की अग्रणी जीपीयू कंपनी नवीडिया के साथ साझेदारी भारत को तकनीकी नवाचार में अग्रणी बना सकती है।
ये बातचीत भारत सेमीकंडक्टर मिशन का हिस्सा हैं, जो 10 अरब डॉलर के निवेश को आकर्षित करने का लक्ष्य रखता है। ताइवान की भूकंप जोखिमों और अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध के बीच भारत एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में उभर रहा है। सरकार 50% वित्तीय सहायता, निर्माण इकाइयों के लिए प्रोत्साहन और तेज मंजूरी प्रक्रिया दे रही है।
सूत्रों के अनुसार गुजरात और उत्तर प्रदेश संभावित स्थान हैं। नवीडिया की भागीदारी प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, कुशल रोजगार और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला ला सकती है। भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में 50% की वृद्धि इस क्षेत्र की क्षमता दर्शाती है।
विशेषज्ञ इसे गेम-चेंजर बता रहे हैं। ‘जीपीयू एआई का नया तेल हैं। भारत का कदम दूरदर्शी है।’ हालांकि जल उपलब्धता, बिजली विश्वसनीयता और प्रतिभा पूल चुनौतियां हैं। सरकार सेमीकंडक्टर पार्कों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों से इन्हें संबोधित कर रही है।
2030 तक सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता के लक्ष्य में नवीडिया साझेदारी उत्प्रेरक साबित हो सकती है। वैष्णव की सक्रिय कूटनीति भारत के तकनीकी परिदृश्य को चमकाएगी।