
ब्रसेल्स में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मुलाकात ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को नई गति प्रदान की। भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने यूरोपीय आयुक्त मारोस सेफकोविक से विस्तृत बातचीत की, जिसमें द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने की संभावनाओं पर जोर दिया गया।
चर्चा के केंद्र में रहे वस्तुओं, सेवाओं और निवेश पर शुल्क छूट के मुद्दे। गोयल ने कृषि उत्पादों, डेयरी और बौद्धिक संपदा अधिकारों पर भारत की चिंताओं को स्पष्ट किया, जबकि सेफकोविक ने पारस्परिक लाभ की बात की।
वर्तमान में दोनों के बीच व्यापार €100 अरब से अधिक का है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि एफटीए से यह 2030 तक दोगुना हो सकता है। भारत के टेक्सटाइल, फार्मा और आईटी निर्यातकों को अपार अवसर दिख रहे हैं।
गोयल ने ‘मेक इन इंडिया’ और डिजिटल अर्थव्यवस्था सुधारों का जिक्र किया, जो यूरोपीय निवेशकों को आकर्षित कर सकते हैं। सेफकोविक ने जलवायु परिवर्तन और श्रम मानकों पर अध्यायों का प्रस्ताव रखा।
बाधाएं बरकरार हैं, जैसे गैर-शुल्क बाधाएं और भू-राजनीतिक तनाव, लेकिन दोनों पक्षों ने तकनीकी वार्ताओं को तेज करने का वादा किया। यह समझौता भारत को चीन पर निर्भरता कम करने में मददगार साबित होगा।
भविष्य की रूपरेखा तैयार हो रही है। अगले वर्ष ढांचागत समझौते की उम्मीद है। यह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करेगा और आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा।