
नई दिल्ली में चल रही चर्चाओं के केंद्र में है भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए)। सूत्रों के अनुसार, इस महीने ही इसका ऐतिहासिक समझौता हो सकता है, जो अरबों डॉलर के व्यापार का द्वार खोलेगा।
लंबे समय से चली आ रही वार्ताओं में ऑटोमोबाइल, डेयरी उत्पादों और बौद्धिक संपदा अधिकार जैसे मुद्दों पर सहमति बन रही है। हालिया उच्च स्तरीय बैठकों ने महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है, खासकर वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच।
भारत के लिए यह समझौता 45 करोड़ उपभोक्ताओं वाले यूरोपीय बाजार तक पहुंच का सुनहरा अवसर है। कपड़ा, दवा और आईटी सेवाओं के निर्यात को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा, वहीं यूरोपीय कंपनियां भारत के मध्यम वर्ग में हरित ऊर्जा और डिजिटल क्षेत्र में निवेश करेंगी।
आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत यह कदम महत्वपूर्ण है। यूरोप को यूक्रेन संकट के बाद आपूर्ति श्रृंखला में भारत एक विश्वसनीय साझेदार नजर आ रहा है।
कृषि सब्सिडी और श्रम मानकों जैसे चुनौतियां बाकी हैं, लेकिन आशावाद हावी है। यदि अंतिम रूप दिया गया, तो 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर बढ़ सकता है। दोनों पक्षों के हितधारक बारीकी से नजर रखे हुए हैं।