
वैश्विक व्यापारिक तनावों के बीच भारत टैरिफ संबंधी चुनौतियों का सामना करने के लिए चार सूत्रीय व्यापक रणनीति अपना रहा है। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री महेंद्र देव ने घोषणा की है कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में देश की जीडीपी वृद्धि दर मजबूत 7.4 प्रतिशत पर कायम रहेगी।
रणनीति का पहला सूत्र निर्यात बाजारों का विविधीकरण है। अमेरिका और यूरोप जैसे पारंपरिक भागीदारों से इतर अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया और लैटिन अमेरिका जैसे उभरते बाजारों पर जोर दिया जा रहा है। आईटी सेवाएं, दवा और वस्त्र क्षेत्रों में भारत का दबदबा बरकरार है।
दूसरा आधार स्तंभ घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है। उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं ने इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों में अरबों डॉलर के निवेश को आकर्षित किया है।
तीसरा रुख द्विपक्षीय व्यापार समझौतों पर केंद्रित है। यूएई, यूनाइटेड किंगडम और ऑस्ट्रेलिया के साथ चल रही वार्ताएं नई संभावनाएं खोल रही हैं।
चौथा महत्वपूर्ण हिस्सा आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती है। बंदरगाहों, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल एकीकरण में भारी निवेश आत्मनिर्भर भारत का आधार तैयार कर रहा है।
अमेरिका द्वारा लगाए स्टील-एल्यूमीनियम शुल्कों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। मुद्रास्फीति नियंत्रण में, विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड स्तर पर। निजी खपत में सुधार आ रहा है। विशेषज्ञ भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था का चमकता सितारा मानते हैं।