
नई दिल्ली। एचपीवी वैक्सीन को लेकर समाज में एक गलत धारणा बनी हुई है कि यह केवल महिलाओं के लिए है। लेकिन विशेषज्ञ डॉ. मीरा पाठक का कहना है कि ह्यूमन पैपिलोमा वायरस दोनों लिंगों को प्रभावित करता है और पुरुषों के लिए भी यह वैक्सीन उतनी ही महत्वपूर्ण है।
इस वायरस के 200 से अधिक प्रकार हैं, जो मुख्य रूप से यौन संपर्क से फैलते हैं। अधिकांश संक्रमण बिना लक्षणों के होते हैं, जिससे व्यक्ति अनजाने में दूसरों को संक्रमित कर देता है।
कुछ स्ट्रेन जननांगों पर मस्से पैदा करते हैं, जो शारीरिक असुविधा देते हैं। हाई-रिस्क स्ट्रेन जैसे 16 और 18 महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर और पुरुषों में पेनाइल, गुदा तथा मुंह के कैंसर का कारण बनते हैं।
डॉ. पाठक के अनुसार, पुरुषों का टीकाकरण न होने से वे खुद खतरे में पड़ते हैं और पार्टनर के लिए भी जोखिम बढ़ाते हैं। वैक्सीन से यह चक्र टूटता है। कई देशों में लड़के-लड़कियों दोनों को दी जाती है।
सबसे बेहतर उम्र 9-14 वर्ष है, जहां दो डोज पर्याप्त। 15 वर्ष से ऊपर तीन डोज। 45 वर्ष तक लगवाई जा सकती है।
भारत में सर्वावैक, गार्डासिल आदि उपलब्ध। डॉक्टर से सलाह लें। साइड इफेक्ट मामूली होते हैं।
जागरूकता बढ़ाकर हम एचपीवी से जुड़ी बीमारियों को रोक सकते हैं।