
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था संकट में है। ऊंचे करों और बिजली के बढ़ते दामों के कारण कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां देश छोड़ रही हैं। वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस प्रवृत्ति को रेखांकित करते हुए कहा कि ऐसी नीतियां निवेश को बर्बाद कर रही हैं।
पिछले कुछ महीनों में यूनिलीवर, पेप्सीको और नेस्ले जैसी दिग्गजों ने या तो संचालन कम किया या पूरी तरह निकल गए। बिजली के दाम 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुके हैं, जबकि लोडशेडिंग ने उत्पादन को ठप कर दिया है। दक्षिण एशिया में सबसे अधिक कॉर्पोरेट टैक्स दरें निवेशकों को दूर भगा रही हैं।
मंत्री ने बताया कि विदेशी निवेश 20 प्रतिशत गिर गया है। ऊर्जा क्षेत्र का सर्कुलर डेट 2.5 ट्रिलियन रुपये से ऊपर पहुंच चुका है, जो उद्योगों को अक्षम बना रहा है। कंपनियां अब बांग्लादेश और वियतनाम जैसे पड़ोसी देशों में स्थानांतरित हो रही हैं।
सरकार सुधारों का दावा कर रही है, जैसे टैरिफ में कमी और निर्यातकों के लिए छूट। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ये कदम देर से उठाए गए हैं। मौजूदा खाता घाटे के बीच ये निकास आर्थिक पुनरुद्धार की राह में बड़ा रोड़ा हैं। तत्काल कार्रवाई जरूरी है।