
ग्रेटर नोएडा में पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर हड़कंप मच गया है। एक ओर प्रशासन साफ-सफाई का दावा कर रहा है, वहीं निवासियों की शिकायतें सेहत पर संकट के बादल मंडराने की ओर इशारा कर रही हैं।
अल्फा, बीटा और ओमिक्रॉन जैसे सेक्टरों में परिवारों ने पेट दर्द, चकत्ते और बुखार की शिकायतें दर्ज की हैं। स्थानीय स्तर पर कराए गए टेस्ट में ई कोलाई बैक्टीरिया और भारी धातुओं की अधिकता पाई गई, जो जीएनआईडीए के रिपोर्ट से मेल नहीं खाती।
‘हमारे टेस्ट मानक के अनुरूप हैं। समस्या घरेलू स्टोरेज में है,’ अधिकारियों का कहना है। लेकिन विरोध तेज हो गया है, कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन शुरू हो चुके हैं।
विशेषज्ञ चेताते हैं कि लंबे समय तक दूषित पानी से किडनी फेलियर जैसी बीमारियां हो सकती हैं। तेजी से बढ़ते शहर में पुरानी पाइपलाइनों की समस्या गंभीर है। गर्मी में स्थिति और बिगड़ सकती है। निवासी तृतीय-पक्ष जांच और नई व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। पारदर्शिता ही विश्वास बहाल कर सकती है।