
भारतीय सरकार ने स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों को अपना सोर्स कोड साझा करने का निर्देश देने वाली खबरों को पूरी तरह गलत ठहराया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (मेइटी) ने स्पष्ट किया कि ऐसी कोई नीति अस्तित्व में नहीं है।
हाल ही में कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि सरकार ने सुरक्षा कारणों से एप्पल, सैमसंग और शाओमी जैसी कंपनियों को अपना सॉफ्टवेयर कोड सौंपने का आदेश दिया है। इससे उद्योग जगत में हड़कंप मच गया था, क्योंकि यह इनोवेशन और निवेश को प्रभावित कर सकता था।
मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘ये खबरें भ्रामक हैं। हम डिजिटल सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए स्वैच्छिक उपायों पर जोर दे रहे हैं।’ प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना के तहत स्मार्टफोन उत्पादन को गति मिल रही है, जहां निर्यात में 40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना नियामक महत्वाकांक्षाओं और तकनीकी संप्रभुता के बीच तनाव को दर्शाती है। 80 करोड़ से अधिक स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं वाले भारत में डेटा स्थानीयकरण और साइबर सुरक्षा के प्रयास जारी हैं। उद्योग संगठनों ने सरकार के रुख का स्वागत किया है।
भविष्य में पारदर्शी संवाद से ही क्षेत्र स्थिर रहेगा। पीएलआई के जरिए स्थानीय मूल्य संवर्धन बढ़ाने का लक्ष्य हासिल करने के लिए विश्वास बहाली जरूरी है। यह स्पष्टीकरण आत्मनिर्भर भारत की दिशा में सकारात्मक कदम है।