
भारत सरकार ने नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित वाहनों को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रियों ने हाइड्रोजन से चलने वाली कार में सवारी कर इस तकनीक की ताकत का जायजा लिया। यह प्रदर्शन देश की हरित गतिशीलता की दिशा में मजबूत इरादे को दर्शाता है।
टेस्टिंग सेंटर में आयोजित इस कार्यक्रम में मंत्रियों ने कार की शानदार प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने बताया कि यह वाहन शून्य उत्सर्जन वाला है और लंबी दूरी तय करने में सक्षम। दिल्ली-एनसीआर जैसे प्रदूषणग्रस्त इलाकों के लिए यह वरदान साबित हो सकता है।
सरकार की नीतियां भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत भारी निवेश हो रहा है। रिफ्यूलिंग स्टेशन, रिसर्च सेंटर और प्रोडक्शन यूनिट्स पर फोकस है। ऑटोमोबाइल कंपनियों को प्रोत्साहन देकर उत्पादन बढ़ाया जा रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोजन वाहन इलेक्ट्रिक कारों से बेहतर विकल्प हैं क्योंकि इनकी रेंज अधिक और रिफिलिंग तेज होती है। हालांकि इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की चुनौती बनी हुई है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक बड़े पैमाने पर अपनाना है।
यह सवारी न केवल जनता को जागरूक करेगी बल्कि निवेशकों का भरोसा भी बढ़ाएगी। भारत का नेट जीरो लक्ष्य अब वाहन क्षेत्र में साकार होता नजर आ रहा है।