
भारत सरकार असंगठित क्षेत्र के लाखों श्रमिकों को बड़ी राहत देने जा रही है। गिग इकॉनमी के कामगारों और घरेलू सहायकों के लिए जल्द शुरू होने वाली नई माइक्रोक्रेडिट योजना में बिना किसी गारंटी के लोन मिलेंगे। यह कदम वित्तीय समावेशन की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
डिलीवरी बॉय, कैब ड्राइवर, फ्रीलांसर जैसे गिग वर्कर्स को अक्सर बैंक लोन नहीं मिलते क्योंकि उनके पास नियमित आय का प्रमाण नहीं होता। इसी तरह 5 करोड़ से अधिक घरेलू कामगार महिलाएं सूदखोरों के चंगुल में फंसी रहती हैं।
योजना के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए 50 हजार तक के लोन आसानी से उपलब्ध होंगे। आधार और यूपीआई से लिंक करके लोन वितरण होगा। ब्याज दरें सब्सिडी वाली रखी जाएंगी।
केंद्र सरकार ने ई-श्रम पोर्टल और मुद्रा योजना के अनुभवों से सीखा है। पायलट प्रोजेक्ट्स में 92 प्रतिशत रिकवरी दर मिली है। उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में सफल परीक्षण हो चुके हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह योजना अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी। हालांकि, अनियमित आय वाले श्रमिकों के लिए क्रेडिट मूल्यांकन चुनौतीपूर्ण होगा। सरकार फिनटेक कंपनियों के साथ साझेदारी कर रही है।
यह न केवल लोन है, बल्कि आत्मनिर्भरता का माध्यम बनेगा। श्रमिकों को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलेगा। जल्द ही दिशानिर्देश जारी होने की उम्मीद है।