
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। कई बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियां ऊंचे करों और बेतहाशा ऊर्जा खर्च के कारण देश छोड़ रही हैं। वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बात का खुलासा किया, जो देश के व्यापारिक माहौल की पोल खोलता है।
मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल और उपभोक्ता सामग्री क्षेत्रों की कंपनियां सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं। ये कंपनियां जो कभी पाकिस्तान के विशाल श्रमिक बल और रणनीतिक स्थान पर भरोसा करती थीं, अब निवेश कहीं और ले जा रही हैं। मंत्री ने कहा, ‘भारी कर बोझ और महंगी बिजली ने कारोबार को असंभव बना दिया है।’
पिछले एक साल में ऊर्जा लागत 40 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुकी है। मुद्रा अवमूल्यन और आयातित ईंधन पर निर्भरता इसके पीछे हैं। जटिल कर व्यवस्था ने कंपनियों की कमर तोड़ दी है। इससे विदेशी निवेश में भारी गिरावट आई है, जो भुगतान संतुलन संकट को गहरा रहा है।
सरकार कर सुधार और ऊर्जा टैरिफ स्थिरीकरण की कोशिश कर रही है, लेकिन आलोचक कहते हैं कि ये कदम नाकाफी हैं। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियां ने पाकिस्तान की आउटलुक घटा दी है। अगर संरचनात्मक समस्याएं न सुलझीं तो और कंपनियां जा सकती हैं।
फैक्टरियां बंद हो रही हैं, नौकरियां जा रही हैं। अर्थशास्त्री चेतावनी दे रहे हैं कि बिना तत्काल नीतिगत बदलाव के पाकिस्तान उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए सबक बन सकता है। वित्त मंत्री का बयान जागृति का संकेत है, लेकिन रास्ता लंबा है।