
आयुर्वेद में घी को अमृत तुल्य माना जाता है। यह न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि हड्डियों को मजबूत करने, तनाव को कम करने और चेहरे पर निखार लाने जैसे अनेक लाभ प्रदान करता है। प्राचीन ग्रंथों से लेकर आधुनिक अध्ययनों तक, घी की महिमा गाई जाती रही है।
देशी गाय के दूध से तैयार शुद्ध घी विटामिन K2 और ओमेगा-3 से भरपूर होता है, जो कैल्शियम के अवशोषण में सहायक है। हड्डियों की कमजोरी या जोड़ों के दर्द से पीड़ित लोगों के लिए यह वरदान है। रात को दूध में घी मिलाकर पीने से हड्डियां तेजी से मजबूत होती हैं।
तनावग्रस्त जीवन में घी ओषधि की तरह काम करता है। यह वात दोष को संतुलित कर मस्तिष्क को पोषण देता है। अश्वगंधा के साथ घी का सेवन चिंता को दूर भगाता है और गहरी नींद दिलाता है।
चेहरे की खूबसूरती के लिए घी का कोई सानी नहीं। हल्दी के साथ लेप लगाने से मुहांसे भाग जाते हैं और त्वचा निखर उठती है। आंतरिक रूप से सेवन से त्वचा हाइड्रेटेड रहती है।
हालांकि, मात्रा का ध्यान रखें। वात प्रकृति वाले अधिक, पित्त वाले कम लें। आयुर्वेद विशेषज्ञ से सलाह लें। सर्दियों में घी का नियमित सेवन स्वास्थ्य का खजाना खोल देगा।