
भारत की अर्थव्यवस्था आने वाले वर्षों में घरेलू खपत के दम पर नई ऊंचाइयों को छूने वाली है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 में देश की जीडीपी वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह अनुमान घरेलू उपभोग की मजबूत रिकवरी और निर्यात में सुधार पर आधारित है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड के बाद की रिकवरी चरण अब स्थिरता की ओर बढ़ रहा है, जहां निजी खपत प्रमुख ड्राइवर के रूप में उभर रही है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 में निजी उपभोग व्यय जीडीपी का 60 प्रतिशत से अधिक योगदान देगा। इसके अलावा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार, बढ़ती आय और कम ब्याज दरें उपभोक्ता विश्वास को बढ़ावा देंगी। सरकारी पूंजीगत व्यय भी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के जरिए विकास को गति प्रदान करेगा। हालांकि, वैश्विक अनिश्चितताएं जैसे भू-राजनीतिक तनाव और कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव चुनौतियां पैदा कर सकते हैं।
विश्लेषकों के मुताबिक, भारत की मजबूत मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता और डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार इस उच्च विकास दर को संभव बनाएगा। निवेशकों के लिए यह खबर सकारात्मक है, क्योंकि तेज जीडीपी वृद्धि से शेयर बाजार और कॉर्पोरेट आय में इजाफा होगा। आने वाले समय में भारत विश्व की सबसे तेज बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शुमार रहेगा। यह रिपोर्ट आर्थिक नीति निर्माताओं के लिए भी महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश प्रदान करती है।