
भारतीय शेयर बाजार पर विदेशी निवेशकों का दबाव बढ़ता जा रहा है। एफआईआई लगातार बिकवाली कर रहे हैं और विश्लेषकों का मानना है कि सकारात्मक संकेत न मिलने तक यह सिलसिला थमने वाला नहीं है।
पिछले एक सप्ताह में एफआईआई ने 15,000 करोड़ रुपये से अधिक की भारतीय इक्विटी बेची है। यह तीसरा लगातार सप्ताह है जब विदेशी निवेशक शुद्ध बिकवाली कर रहे हैं। इससे घरेलू निवेशकों में चिंता की लहर दौड़ गई है।
अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में वृद्धि ने विदेशी पूंजी को उभरते बाजारों से दूर खींच लिया है। मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव और फेड रिजर्व के फैसलों की अनिश्चितता ने जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है।
घरेलू म्यूचुअल फंडों ने 8,500 करोड़ रुपये की खरीदारी कर कुछ राहत दी है, लेकिन विश्लेषक चेतावनी दे रहे हैं कि खुदरा निवेशकों की भागीदारी अकेले बाजार को नहीं संभाल सकती।
निफ्टी 50 सूचकांक ने दो सप्ताह में लगभग 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की है, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक और गहराई में उतरे हैं। बाजार की चौड़ाई तेजी से खराब हुई है।
बाजार को उबारने के लिए प्रमुख ट्रिगर की जरूरत है—अमेरिकी महंगाई में नरमी, फेड का नरम रुख, या मजबूत तिमाही नतीजे। तब तक निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए।
आज बाजार कमजोर शुरुआत के साथ खुला। तात्कालिक सकारात्मक उत्प्रेरक नजर नहीं आ रहे, इसलिए बाजार में और गिरावट का खतरा बना हुआ है। सतर्क रहें और गुणवत्ता वाले लार्जकैप शेयरों पर फोकस करें।