
आधुनिक युद्ध के बदलते परिदृश्य में विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम पर काबू पाना ही मैदान-ए-जंग में बढ़त हासिल करने का सबसे बड़ा हथियार साबित होगा। रेडियो तरंगों से लेकर गामा किरणों तक फैले इस अदृश्य क्षेत्र ने सैन्य रणनीतियों को हमेशा के लिए बदल दिया है।
स्पेक्ट्रम रडार, सैटेलाइट संचार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और सटीक हथियारों का आधार है। ‘जो स्पेक्ट्रम पर राज करेगा, वही जंग जीतेगा,’ कहते हैं रक्षा विश्लेषक डॉ. राजेश कुमार। हालिया संघर्षों में ड्रोन जैमिंग और कम्युनिकेशन ब्लैकआउट ने इसकी अहमियत साबित की है।
नाटो के अभ्यासों से लेकर यूक्रेन युद्ध तक, स्पेक्ट्रम वर्चस्व ने संख्या में कम सेनाओं को भी फायदा पहुंचाया। चीन और रूस जैसे देश हाइपरसोनिक हथियारों व क्वांटम रडार पर भारी निवेश कर रहे हैं। अमेरिका का JADC2 प्रोजेक्ट सभी डोमेन में स्पेक्ट्रम एकीकरण पर केंद्रित है।
भारत भी पीछे नहीं। डीआरडीओ के प्रोजेक्ट्स जैसे संयुक्ता ईडब्ल्यू सिस्टम और डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स रिसर्च लेबोरेटरी के प्रयास स्पेक्ट्रम मैनेजमेंट को मजबूत कर रहे हैं। चुनौतियां भी कम नहीं—5जी नेटवर्क से भीड़भाड़, एआई जैमिंग और अंतरराष्ट्रीय नियम।
भविष्य में कॉग्निटिव रेडियो और डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स क्रांति लाएंगे। जैसे-जैसे निवेश बढ़ रहा है, स्पष्ट है कि अगले युद्ध अदृश्य तरंगों पर निर्भर करेंगे। अनदेखा करने वाले देश पीछे रह जाएंगे।