
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव से बचना मुश्किल हो गया है। लेकिन एक ऐसी सरल विधि है जो आपको अंदरूनी सुकून दे सकती है – गहरी सांस लेना। यह प्राचीन तकनीक अब वैज्ञानिकों द्वारा भी प्रमाणित हो चुकी है।
गहरी सांस लेने का मतलब है डायाफ्राम को पूरी तरह इस्तेमाल करते हुए धीमी-धीमी सांसें लेना। इससे शरीर का पैरासिम्पेथेटिक सिस्टम सक्रिय होता है, जो हृदय गति कम करता है और रक्तचाप नियंत्रित रखता है। हार्वर्ड के अध्ययन बताते हैं कि रोजाना पांच मिनट की प्रैक्टिस से कोर्टिसोल हार्मोन 30% तक घट जाता है।
मानसिक स्वास्थ्य के अलावा शारीरिक फायदे भी कम नहीं। फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है, ऑक्सीजन सप्लाई बेहतर होती है। इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और पाचन तंत्र सुचारू रहता है। चिंता रोगियों के लिए यह दवा का बेहतरीन विकल्प है।
शुरुआत कैसे करें? 4-7-8 तकनीक अपनाएं – 4 सेकंड सांस अंदर, 7 सेकंड रोकें, 8 सेकंड बाहर। इसे यात्रा, मीटिंग या सोने से पहले करें। धीरे-धीरे यह आपकी तनाव प्रतिक्रिया बदल देगी।
विश्व स्तर पर माइंडफुलनेस का चलन बढ़ रहा है। गहरी सांस लेना हर किसी के लिए उपलब्ध है। आज से ही शुरू करें और जीवन में शांति का अनुभव करें।