
स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व के शीर्ष नेता एकत्रित हो रहे हैं। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) का यह वार्षिक समिट 19 से 23 जनवरी तक चलेगा, जहां पांच प्रमुख वैश्विक चुनौतियों पर गहन चर्चा होगी। सरकारें, उद्योगपति, सामाजिक संगठन और शिक्षाविद् मिलकर समाधान खोजेंगे।
डब्ल्यूईएफ का मानना है कि सामूहिक प्रयासों से ही इन समस्याओं का सामना किया जा सकता है। आर्थिक प्रगति, मजबूती और नवाचार पर जोर दिया जाएगा, ताकि वर्तमान जटिलताओं से निपटा जा सके और भविष्य के अवसरों को हासिल किया जाए।
भारत इस समिट में दमदार तरीके से डटकर। 100 से अधिक प्रमुख कंपनियों के सीईओ, केंद्रीय मंत्री और कई राज्यों के मुख्यमंत्री विदेशी निवेश आकर्षित करने पहुंचे हैं। दुनिया की सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में भारत अपनी ताकत दिखाएगा।
केंद्रीय मंत्रियों में अश्विनी वैष्णव (रेल, सूचना प्रसारण), शिवराज सिंह चौहान (कृषि, ग्रामीण विकास), प्रह्लाद जोशी (नवीकरणीय ऊर्जा) और राममोहन नायडू (नागर विमानन) शामिल। मुख्यमंत्रियों में देवेंद्र फडणवीस (महाराष्ट्र), एन. चंद्रबाबू नायडू (आंध्र), ए. रेवंत रेड्डी (तेलंगाना), मोहन यादव (मध्य प्रदेश), हेमंत सोरेन (झारखंड) और हिमंत बिस्वा सरमा (असम) हैं।
‘स्पिरिट ऑफ डायलॉग’ थीम के साथ शुरू हो रहा समिट अमेरिकी टैरिफ विवाद और राजनीतिक अस्थिरता के बीच हो रहा है। एआई विशेषज्ञ जेन्सेन हुआंग, सत्य नडेला, डेमिस हसाबिस और डारियो अमोदेई भी शिरकत करेंगे।
यह समिट न केवल चर्चाओं का मंच है, बल्कि ठोस निर्णयों का केंद्र बनेगा, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगा।