
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने संघीय बजट 2026-27 में घरेलू मांग को मजबूत करने पर विशेष जोर देने की सिफारिश की है। आज जारी अपनी विस्तृत रिपोर्ट में सीआईआई ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच घरेलू उपभोग ही भारत की विकास गाथा का आधार स्तंभ है।
रिपोर्ट के अनुसार, जीडीपी का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा रखने वाले निजी उपभोग में सुधार हुआ है, लेकिन इसे स्थायी बनाने के लिए लक्षित कदम आवश्यक हैं। सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, ‘महंगाई नियंत्रित होने और ग्रामीण आय बढ़ने के साथ अब क्रय शक्ति बढ़ाने वाले उपायों पर दोहरा दबाव डालने का समय है।’
मुख्य सुझावों में डीबीटी का विस्तार, ग्रामीण क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर व्यय तेज करना और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं पर कर छूट शामिल हैं। जीएसटी स्लैब सरलीकरण से दैनिक जरूरत की वस्तुएं सस्ती होंगी, जिससे शहरी-ग्रामीण बाजारों में दबी मांग बाहर आएगी।
भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक व्यापार मंदी के जोखिमों के बीच सीआईआई ने ‘घरेलू प्राथमिकता’ रणनीति अपनाने का आह्वान किया है। मेक इन इंडिया पहलों से स्थानीय रोजगार और आंतरिक बाजारों को प्रोत्साहन मिलेगा। बनर्जी ने जोर देकर कहा, ‘सुधार निरंतर और साहसिक होने चाहिए।’
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के आंकड़ों से शहरी उपभोग में 7.2 प्रतिशत और ग्रामीण एफएमसीजी मांग में 9 प्रतिशत वृद्धि साफ है। वित्त मंत्री के समक्ष सीआईआई का ब्लूप्रिंट समावेशी विकास का मार्ग प्रशस्त करता है। 8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि लक्ष्य के साथ भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था बनेगा।