
भारतीय खेल इतिहास में चुन्नी गोस्वामी का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा है। फुटबॉल के मैदान पर कप्तानी करते हुए एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले इस महान खिलाड़ी ने क्रिकेट में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। 85 वर्ष की आयु में उनका निधन होने से खेल जगत शोकाकुल है।
कोलकाता में 1938 में जन्मे सुभिमल गोस्वामी ने कम उम्र में ही मोहन बागान क्लब में कदम रखा। उनकी ड्रिबलिंग और गोल करने की कला लाजवाब थी। 1962 के एशियाई खेलों में कप्तान के रूप में भारत को स्वर्ण दिलाया, जिसमें फाइनल में दक्षिण कोरिया को 2-1 से हराया। यह उपलब्धि उनके करियर का चरमोत्कर्ष था।
फुटबॉल से संन्यास लेकर उन्होंने क्रिकेट की ओर रुख किया। 1963 में बंगाल के लिए डेब्यू किया और जल्द ही टेस्ट टीम में जगह बनाई। पांच टेस्ट मैचों में 303 रन बनाए, जिसमें अर्धशतक भी शामिल है। बंगाल की कप्तानी में उन्होंने शानदार नेतृत्व किया।
चुन्नी गोस्वामी की खासियत थी उनकी बहुमुखी प्रतिभा। आधुनिक सुविधाओं के अभाव में दो खेलों में महारत हासिल करना आसान नहीं था। बैंक अधिकारी के रूप में भी सेवा दी और खेल प्रशासक बने। उनका जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा है।
खेल प्रेमी उनके योगदान को हमेशा याद रखेंगे। विशेषज्ञता के इस दौर में उनकी कहानी बहुमुखी प्रतिभा की मिसाल है। अलविदा, चुन्नी दा!