
भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में उगने वाला चिरायता आयुर्वेद की अनमोल धरोहर है। यह बारहमासी पौधा ठंडी जलवायु में फलता-फूलता है और अपनी कड़वाहट के बावजूद सेहत के लिए रामबाण साबित होता है।
चिरायता शरीर के विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालकर रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है। बुखार, खांसी और सर्दी-जुकाम जैसी परेशानियों में यह वायरल संक्रमणों पर काबू पाने में सहायक है। जड़ और पत्तियों में मौजूद गुण एनीमिया को दूर करने में भी मददगार हैं, क्योंकि यह रक्त निर्माण को बढ़ावा देता है।
लीवर की सेहत के लिए स्वेरचिरिन जैसे यौगिक चिरायता को विशेष बनाते हैं, जो हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करते हैं। पाचन系त के लिए तो यह वरदान है—कड़वापन पाचन रसों को जागृत कर अपच, गैस और कब्ज से मुक्ति दिलाता है।
खून शुद्धिकरण, भूख बढ़ाना, पेट के कीड़े नष्ट करना, जोड़ों का दर्द कम करना और त्वचा को स्वस्थ रखना—चिरायता सभी मोर्चों पर विजयी है। एंटीऑक्सीडेंट गुण त्वचा को जवान बनाए रखते हैं।
काढ़ा बुखार और लीवर के लिए, पाउडर पाचन व शुद्धिकरण के लिए तथा चिरायता जल हल्की बीमारी व डिटॉक्स हेतु उपयोगी। लेकिन अधिकता हानिकारक—आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह अनिवार्य।
आयुर्वेद की यह चमत्कारी औषधि आधुनिक जीवनशैली में प्राकृतिक रक्षा कवच प्रदान करती है।