
देश में महिलाओं के लिए सर्वाइकल कैंसर एक गंभीर संकट बन चुका है। हर आठ मिनट में एक महिला इस बीमारी की चपेट में आकर दम तोड़ रही है। प्रमुख कैंसर विशेषज्ञ डॉ. मीरा पाठक ने इस चेतावनी से सबको हिलाकर रख दिया है।
प्रति वर्ष करीब 1.2 लाख नई मरीजों का पता चलता है और 75 हजार से अधिक की मौत हो जाती है। यह बीमारी ज्यादातर एचपीवी वायरस से होती है, जो 99 प्रतिशत मामलों का कारण है। लेकिन टीकाकरण दर महज 1.2 प्रतिशत है। 30-49 वर्ष की महिलाओं में जांच का स्तर केवल 2.5 प्रतिशत है।
डॉ. पाठक के अनुसार, ग्रामीण इलाकों में जागरूकता की भारी कमी है। प्रारंभिक लक्षण जैसे असामान्य रक्तस्राव या पेल्विक दर्द को नजरअंदाज कर दिया जाता है। शहरी महिलाएं भी जोखिम से अछूती नहीं। जीवनशैली और देरी से जांच बड़ी समस्या है।
अन्य देशों के उदाहरण प्रेरणादायक हैं। ऑस्ट्रेलिया ने टीकाकरण और जांच से मामलों में 50 प्रतिशत कमी लाई। भारत को इसी दिशा में कदम उठाने होंगे। सरकार ने एचपीवी वैक्सीन ट्रायल शुरू किया है, लेकिन विस्तार जरूरी है।
विशेषज्ञों की मांग है – स्कूलों में अनिवार्य टीकाकरण, आशा कार्यकर्ताओं से जांच विस्तार और जागरूकता अभियान। डॉ. पाठक कहती हैं, ‘समय रहते हस्तक्षेप से हर मौत रोकी जा सकती है।’ सर्वाइकल कैंसर जागरूकता माह में यह संदेश जोरदार है – अभी行动 लें।