
महिलाओं के लिए घातक साबित हो रहे सर्वाइकल कैंसर से लड़ाई में वैक्सीनेशन, नियमित जांच और शीघ्र उपचार तीनों सबसे मजबूत हथियार साबित हो रहे हैं। एचपीवी वायरस से होने वाले इस कैंसर को रोका जा सकता है, यदि सही समय पर कदम उठाए जाएं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता और पहुंच बढ़ाने से इसे पूरी तरह खत्म किया जा सकता है।
एचपीवी वैक्सीन रोकथाम का पहला कदम है। 9 से 14 साल की लड़कियों के लिए अनुशंसित यह वैक्सीन कैंसर पैदा करने वाले वायरस स्ट्रेन को निष्क्रिय कर देती है। भारत में सरकार की मुहिमों से लाखों लड़कियों को टीका लगाया जा चुका है। ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में वैक्सीनेशन से कैंसर के केस 50 प्रतिशत तक कम हो गए हैं।
जांच से शुरुआती पहचान संभव है। पाप स्मीयर, एचपीवी टेस्ट और एसिटिक एसिड से जांच (VIA) प्रभावी तरीके हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन 30-49 साल की महिलाओं के लिए दो बार जांच की सलाह देता है। भारत में सालाना 75,000 से ज्यादा मौतें होती हैं, लेकिन आयुष्मान भारत जैसी योजनाएं ग्रामीण इलाकों में सुविधा पहुंचा रही हैं।
शुरुआती उपचार से 90 प्रतिशत से ज्यादा सफलता मिलती है। क्रायोथेरेपी या LEEP से असामान्य कोशिकाओं को हटाया जा सकता है। उन्नत स्टेज में सर्जरी, रेडिएशन या कीमोथेरेपी जरूरी होती है। देरी से स्टेज III-IV तक पहुंच जाता है, इसलिए जागरूकता अभियान महत्वपूर्ण हैं।
वैक्सीन को लेकर भ्रम और पहुंच की कमी चुनौतियां हैं। स्कूलों में टीकाकरण, पुरुषों को वैक्सीन और कम्युनिटी प्रोग्राम से लक्ष्य हासिल हो सकता है। वैश्विक प्रयासों से सर्वाइकल कैंसर इतिहास बन सकता है। महिलाओं को सशक्त बनाना ही असली जीत होगी।