
सर्दियों के खेलों में बॉबस्ले का अलग ही स्थान है। इसे ‘बर्फ का फॉर्मूला 1’ कहा जाता है, जहां टीमें बर्फीले ट्रैक पर 150 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से सरपट दौड़ती हैं। हर मोड़ पर खतरे का सामना करते हुए एथलीट अपनी जान जोखिम में डालते हैं।
यह खेल स्विट्जरलैंड के सेंट मोरित्ज में 19वीं सदी के अंत में शुरू हुआ। अमीर पर्यटक सड़कों पर स्लेड दौड़ाते थे, जो जल्द ही ओलंपिक का हिस्सा बन गया। चार सदस्यीय टीम में पायलट स्लेड को नियंत्रित करता है, जबकि पुशर शुरूआती धक्का देते हैं और ब्रेकमैन अंत में रोकते हैं।
ट्रैक 1200 से 1500 मीटर लंबे होते हैं, जिनमें 15-20 कर्व्स और 100 मीटर तक की ऊंचाई। जी-फोर्स 5G तक पहुंच जाता है। जर्मनी, अमेरिका और कनाडा जैसे देश इस खेल में छाए रहते हैं। आधुनिक स्लेड कार्बन फाइबर से बने होते हैं, जो हवा प्रतिरोध कम करते हैं।
महिलाओं का मुकाबला भी लोकप्रिय हो रहा है। गर्मियों में पहियों वाली स्लेड से अभ्यास होता है। विश्व कप और ओलंपिक में लाखों दर्शक इसे देखते हैं। बॉबस्ले साहस, टीमवर्क और तकनीक का अनोखा संगम है।