
भारतीय बैंकिंग क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2026 में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है, जहां कुल क्रेडिट ग्रोथ 7 प्रतिशत से अधिक रही। इसका मुख्य कारण खुदरा ऋणों में आई जबरदस्त बढ़ोतरी है। उपभोक्ताओं का आत्मविश्वास बढ़ा है और लोग घर, कार तथा निजी जरूरतों के लिए ऋण ले रहे हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, पर्सनल लोन, होम लोन और ऑटो लोन जैसे सेगमेंट ने इस विकास को गति दी। बैंकों ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच बनाई। आरबीआई की उदार नीतियों ने ब्याज दरों को आकर्षक बनाए रखा।
हालांकि, कॉर्पोरेट ऋणों की वृद्धि सुस्त रही। इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों में निवेश कमजोर पड़ा। रिटेल का दबदबा बैंकिंग की नई तस्वीर पेश करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह रफ्तार बनी रहेगी, बशर्ते वैश्विक अनिश्चितताएं न बढ़ें। उधारीदारों को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी चुकौती क्षमता का आकलन करें। यह ट्रेंड अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में सहायक सिद्ध हो रहा है।