
ढाका, 19 जनवरी। बांग्लादेश की अदालत ने हिंदू नेता चिन्मय कृष्ण दास और 38 अन्य के खिलाफ चट्टोग्राम कोर्ट परिसर के बाहर वकील सैफुल इस्लाम अलिफ की हत्या के मामले में आरोप तय कर दिए हैं। यह घटना नवंबर 2024 में हुई थी, जब देश में सांप्रदायिक तनाव चरम पर था।
चट्टोग्राम डिविजनल स्पीडी ट्रायल ट्रिब्यूनल के न्यायाधीश मोहम्मद जाहिदुल हक ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद यह फैसला सुनाया। शिकायतकर्ता के वकील रेहानुल वाजेद चौधरी ने बताया कि चिन्मय पर आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और 109 (उकसाना) के तहत मुकदमा चलेगा, जबकि अन्य 22 पर अलग धाराएं लगी हैं।
39 आरोपियों में 23 जेल में हैं, बाकी 16 फरार। चिन्मय की पेशी पर कोर्ट के आसपास भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई, जिसमें RAB, पुलिस और सेना के करीब 900 जवान तैनात थे।
सुनवाई में चिन्मय ने बिना वकील के खुद अपनी सफाई दी और हत्या में संलिप्तता से इनकार करते हुए गहन जांच की मांग की। 26 नवंबर को चिन्मय की देशद्रोह मामले में जमानत खारिज होने पर हिंसक झड़पों में अलिफ की मौत हो गई थी।
25 नवंबर को ढाका से गिरफ्तार चिन्मय को जमानत न मिलने पर जेल भेजा गया था। हिंदू समुदाय ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किए। शेख हसीना सरकार गिरने और यूनुस के अंतरिम प्रशासन के बाद हिंदुओं पर हमले बढ़े हैं। भारत ने अल्पसंख्यक उत्पीड़न की निंदा की है।
यह केस बांग्लादेश की न्याय व्यवस्था और सांप्रदायिक सद्भाव की कसौटी बनेगा।