
हर भारतीय घर में केला एक लोकप्रिय फल है, जो ताजगी और ऊर्जा का स्रोत माना जाता है। लेकिन इसके छिलके को ज्यादातर लोग बिना सोचे फेंक देते हैं। नवीनतम वैज्ञानिक खोजें बताती हैं कि यह छिलका असल में पोषक तत्वों का भंडार है, जो शरीर को कई तरीकों से लाभ पहुंचाता है।
एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटीमाइक्रोबियल गुणों से युक्त केले का छिलका शरीर के विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है। यह कोशिकाओं की रक्षा करता है, इम्यूनिटी मजबूत बनाता है और संक्रमणों से बचाव करता है। अध्ययनों से पता चला है कि छिलके में गूदे से कहीं अधिक गैलोकैटेचिन जैसे शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं।
फ्लेवोनॉइड्स, टैनिन और सैपोनिन जैसे तत्व फ्री रेडिकल्स से लड़ते हैं, जो कैंसर, हृदय रोग और जल्दी बुढ़ापे का कारण बनते हैं। इसके अलावा, छिलके की बैक्टीरिया-नाशक क्षमता ई कोलाई, सलमोनेला और स्टेफिलोकोकस जैसे खतरे को समाप्त करती है। ये बैक्टीरिया पाचन समस्याएं, बुखार और मुंह के संक्रमण पैदा करते हैं।
फंगल संक्रमणों पर भी गैलिक एसिड और कैटेचिन प्रभावी हैं। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि अच्छे से धोए छिलके को स्मूदी, चाय, बेकिंग या फेस पैक में डालें। एलर्जी की आशंका हो तो चिकित्सक से परामर्श लें। इस साधारण छिलके को अपनाकर आप स्वस्थ जीवन की नई दिशा पा सकते हैं।