
मुंबई, 19 जनवरी। कश्मीरी पंडितों के दर्दनाक पलायन के 36 वर्ष पूरे होने पर फिल्मकार और सामाजिक कार्यकर्ता अशोक पंडित ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भावुक अपील की है। इंस्टाग्राम पर साझा वीडियो में उन्होंने 1990 की भयावह रातों को याद किया, जब 18-19 जनवरी की मध्यरात्रि कश्मीर घाटी में अंधेरा पसर गया।
मस्जिदों को छोड़ शेष स्थानों पर बिजली काट दी गई और मस्जिदों से कश्मीरी हिंदुओं के सफाए की धमकियां गूंजीं। हजारों परिवारों को अपना सबकुछ छोड़कर भागना पड़ा। पंडित ने कहा कि आज भी यह समुदाय अपने देश में शरणार्थी जीवन जी रहा है।
जम्मू के जगती कैंप, सबसे बड़े शरणार्थी शिविर में हालात दयनीय हैं। कोई बड़ा नेता वहां नहीं पहुंचा। बुनियादी सुविधाओं के अभाव में लोग तड़प रहे हैं। पंडित ने पुनर्वास के लिए कोई ठोस नीति न बनने पर अफसोस जताया।
पीएम मोदी से उन्होंने उच्च स्तरीय समिति गठित करने का अनुरोध किया, जो जगती कैंप का दौरा कर 36 वर्षों से पीड़ित इस शांतिप्रिय समुदाय की मांगों का आकलन करे। सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित हों, ताकि सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।
1990 का यह पलायन अलगाववाद और हिंसा का काला अध्याय है। सरकारी योजनाएं अपर्याप्त साबित हुईं। अशोक पंडित की यह अपील सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जो घर वापसी और न्याय की मांग को तेज कर रही है। क्या सरकार इस दर्द को समझेगी?