
रसोई के हर कोने में मौजूद हींग न केवल स्वाद बढ़ाती है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी रामबाण है। ईरान और अफगानिस्तान के शुष्क इलाकों से प्राप्त इस रेजिन को आयुर्वेद में सदियों से औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। पाचन तंत्र को मजबूत बनाने से लेकर मोटापा घटाने तक, हींग के फायदे अनगिनत हैं।
हींग का उत्पादन एक कठिन प्रक्रिया है। फेरुला पौधे की जड़ों में चीरा लगाकर दूधिया रस निकाला जाता है, जो सूखने पर सुनहरी गांठ बन जाता है। घी में तड़का लगाने पर इसका तेज गंध वाला स्वाद प्याज-लहसुन जैसा हो जाता है, जो शाकाहारी व्यंजनों को विशेष बनाता है।
पाचन संबंधी समस्याओं में हींग सबसे कारगर है। इसमें मौजूद कूमारिन्स आंतों की मांसपेशियों को शिथिल करते हैं, जिससे गैस, अपच और सूजन दूर होती है। आधुनिक शोध भी बताते हैं कि यह आईबीएस और कब्ज में राहत देती है। गुनगुने पानी में आधा चम्मच हींग मिलाकर पीने से तुरंत असर दिखता है।
वजन घटाने वालों के लिए हींग वरदान है। यह भूख नियंत्रित करती है, चयापचय बढ़ाती है और वसा जलाने में मदद करती है। भारतीय अध्ययनों में पाया गया कि नियमित सेवन से पेट की चर्बी 5-10% तक कम हुई। फाइबर युक्त होने से यह लंबे समय तक पेट भरा रखती है।
इसके अलावा हींग एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर है, जो इम्यूनिटी बढ़ाती है और जोड़ों के दर्द में आराम देती है। सर्दी-खांसी, मासिक धर्म दर्द और ब्लड शुगर कंट्रोल में भी उपयोगी। हालांकि अधिक मात्रा से चक्कर आ सकते हैं, इसलिए संयम बरतें।
दाल, सब्जी या चाय में हींग का प्रयोग करें। यह स्वाद और सेहत का सच्चा साथी साबित होगी।