
मुंबई। 1987 में ‘डकैत’ फिल्म के धुंधलाए परिदृश्यों में एक चेहरा चमका, जो भोपाल की मिट्टी से सींचा था। अरुण वर्मा का जन्म 1960 में मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक नगरी भोपाल में हुआ। वहां की गलियां उन्हें संवादों की वो धुन सिखा गईं, जिसमें दर्द और ठिठोली का अनोखा संगम था।
मुंबई पहुंचकर भी उन्होंने अपनी जड़ें नहीं छोड़ीं। हर किरदार में आम आदमी की सांस फूटी। राज कपूर की ‘हिना’ से सुभाष घई की ‘खलनायक’ तक, दिग्गजों ने उन पर भरोसा किया। संजय दत्त, माधुरी दीक्षित के बीच उनकी छोटी भूमिकाएं भी यादगार रहीं।
90 के दशक की मसाला फिल्मों से 2000 के कॉमेडी धमाकों तक उनका जलवा बरकरार। सलमान खान संग ‘मुझसे शादी करोगी’ में हंसी के फव्वारे छूटे, तो ‘किक’ ने 200 करोड़ का रिकॉर्ड तोड़ा। नई पीढ़ी ने उन्हें अपनाया।
छोटे बजट की फिल्मों से लेकर ब्लॉकबस्टर तक, कैमरा ही उनकी दुनिया था। 20 जनवरी 2022 को भोपाल के अस्पताल में दिमाग व फेफड़ों में ब्लॉकेज से उनका निधन हो गया। हिंदी सिनेमा ने एक जज्बाती कलाकार खो दिया।