
भारतीय बैडमिंटन की दुनिया में अपर्णा पोपट का नाम एक मिसाल है। अहमदाबाद की यह बेटी न केवल कोर्ट पर छाईं, बल्कि महिला खिलाड़ियों के लिए दरवाजे खोलने वाली योद्धा बनीं।
1997 में राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीतकर उन्होंने सफर शुरू किया। इसके बाद 1998 से 2002 तक लगातार पांच सिंगल्स खिताब हासिल किए, जो आज भी रिकॉर्ड है। उनकी आक्रामक स्मैश और तेज फुटवर्क ने प्रतिद्वंद्वियों को रुला दिया।
अंतरराष्ट्रीय पटल पर भी कमाल। 2002 राष्ट्रमंडल खेलों में सिंगल्स और मिक्स्ड डबल्स में कांस्य। 2003 ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप में क्वार्टरफाइनल तक पहुंचकर पहली भारतीय महिला बनीं। इन सफलताओं ने महिला बैडमिंटन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।
कोर्ट से बाहर भी उनका योगदान सराहनीय। युवा खिलाड़ियों को ट्रेनिंग, बेहतर सुविधाएं और समान अवसर दिलाने में अग्रणी। उन्होंने चयन समितियों में सेवा की और सायना नेहवाल, पीवी सिंधु जैसे सितारों को प्रेरित किया।
2006 में संन्यास के बाद कोचिंग और प्रशासन में सक्रिय। आज भारतीय महिलाएं विश्व पटल पर धूम मचा रही हैं, इसका श्रेय पोपट को भी जाता है। उनकी कहानी हर महत्वाकांक्षी लड़की के लिए प्रेरणा है।