
गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक दवाओं के सेवन से नवजात शिशुओं में ग्रुप बी स्ट्रेप्टोकोकस (जीबीएस) संक्रमण का जोखिम काफी बढ़ जाता है। एक ताजा शोध ने इस चौंकाने वाले संबंध को उजागर किया है, जो गर्भवती महिलाओं और डॉक्टरों के लिए चेतावनी भरा संदेश लेकर आया है।
ग्रुप बी स्ट्रेप एक सामान्य बैक्टीरिया है जो स्वस्थ वयस्कों के 25-30 प्रतिशत में पाया जाता है, लेकिन नवजातों के लिए यह घातक साबित हो सकता है। निमोनिया, सेप्सिस और मेनिन्जाइटिस जैसी गंभीर बीमारियां पैदा कर सकता है।
शोधकर्ताओं ने हजारों गर्भवती महिलाओं और उनके शिशुओं के आंकड़ों का विश्लेषण किया। पता चला कि तीसरी तिमाही में एंटीबायोटिक लेने वाली माताओं के शिशुओं में जीबीएस का खतरा 27 प्रतिशत अधिक था। कारण? एंटीबायोटिक्स मां के माइक्रोबायोम को नष्ट कर जीबीएस को बढ़ावा देते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि मूत्र मार्ग संक्रमण या दंत समस्याओं के इलाज के लिए एंटीबायोटिक्स जरूरी होते हैं, लेकिन अनावश्यक उपयोग से बचना चाहिए। अब अस्पताल जीबीएस जांच को और सख्त कर रहे हैं।
प्रोबायोटिक्स और वैकल्पिक उपचारों पर शोध तेज हो गया है। गर्भवती महिलाओं से अपील है कि हर दवा डॉक्टर से सलाह लेकर ही लें। यह खोज एंटीबायोटिक प्रतिरोध के वैश्विक संकट के बीच आई है, जो भविष्य की पीढ़ियों के लिए खतरे की घंटी बजा रही है। स्वस्थ मां और मजबूत शिशु सुनिश्चित करने का समय अब है।