
गर्भावस्था का समय मां के लिए खुशियों भरा होता है, लेकिन हीमोग्लोबिन की कमी इस खुशी में ग्रहण लगा सकती है। यह समस्या न केवल मां की थकान बढ़ाती है, बल्कि समय से पहले प्रसव, कम वजन वाला बच्चा और रक्तस्राव जैसे जोखिम पैदा करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, दुनिया भर में आधी गर्भवती महिलाओं को इसका सामना करना पड़ता है।
इसकी वजह? भ्रूण को अधिक आयरन चाहिए, रक्त की मात्रा 50% बढ़ जाती है और भोजन से जरूरी पोषण नहीं मिल पाता। लक्षण चुपके से आते हैं—थकान, चक्कर, पीली त्वचा और सांस फूलना। पहली तिमाही से ही ब्लड टेस्ट जरूरी।
डॉक्टर कहते हैं, ’11 ग्राम/डीएल से कम हीमोग्लोबिन खतरे की घंटी है।’ तुरंत आयरन सप्लीमेंट और विटामिन सी युक्त आहार शुरू करें। पालक, दाल, अनार, संतरा और चुकंदर अपनाएं।
प्रतिदिन 30-60 एमजी आयरन वाली गोलियां लें, लेकिन चाय-दूध से परहेज करें। कच्चा लोहे का बर्तन इस्तेमाल करें। योग और हल्की सैर रक्त संचार बढ़ाए।
दिल्ली की प्रिया ने 8.5 ग्राम/डीएल पर इलाज कराया, स्वस्थ बच्चा हुआ। नियमित जांच से आप सुरक्षित रहें। निष्कर्षतः, जागरूकता और सही उपायों से गर्भावस्था को सुरक्षित बनाएं।