
जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का जोरदार स्वागत किया है, जिसमें गैर-अफिलिएटेड दीनी मदरसों को मनमाने ढंग से बंद करने की कार्रवाई को असंवैधानिक ठहराया गया। उन्होंने इसे भारतीय संविधान की जीत करार दिया।
मदनी ने उन सभी सरकारों को कड़ा संदेश दिया जो मदरसों को बंद करके अपनी पीठ थपथपाते थे। ऐसे कदम न केवल गैरकानूनी थे, बल्कि अंततः उसी सरकारों के लिए अपमानजनक साबित हुए। जमीयत ने श्रावस्ती के 30 मदरसों का प्रतिनिधित्व किया और उत्तराखंड के खिलाफ भी संघर्ष जारी रखा है।
इस फैसले से इन प्रयासों को बल मिला। उन्होंने मदरसा संचालकों से आग्रह किया कि वे अपनी व्यवस्था को और सशक्त बनाएं ताकि विरोधियों को कोई गुजोर न मिले। अदालत ने स्पष्ट कहा कि मान्यता न होने मात्र से मदरसे बंद नहीं किए जा सकते। उत्तर प्रदेश के नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं।
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के अनुच्छेद 30(1) सिद्धांत की पुष्टि की, जो ऐसी संस्थाओं को पूर्ण संरक्षण देता है। मदनी ने सभी राज्यों से नीतियों की समीक्षा और भेदभावपूर्ण कार्रवाइयों पर रोक लगाने की मांग की। जमीयत अल्पसंख्यक अधिकारों की रक्षा के लिए डटकर लड़ेगी। वकीलों और मदरसों को बधाई दी।