
भारत में चिकित्सा अनुसंधान को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का व्यापक उपयोग किया जाएगा। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने घोषणा की है कि एआई तकनीक अनुसंधान की गति को कई गुना बढ़ा देगी और स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांति लाएगी।
नई दिल्ली में आयोजित एक महत्वपूर्ण सम्मेलन में अधिकारी ने कहा कि एआई विशाल डेटा सेट्स का विश्लेषण करके ऐसी जानकारियां उजागर करेगा जो पारंपरिक तरीकों से असंभव हैं। दवा खोज से लेकर व्यक्तिगत चिकित्सा तक, एआई अनुसंधान की अवधि को वर्षों से महीनों में बदल देगा।
प्रमुख योजनाओं में प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में एआई संचालित अनुसंधान केंद्र स्थापित करना शामिल है। ये केंद्र जीनोमिक डेटा प्रोसेसिंग, महामारी पूर्वानुमान और क्लिनिकल ट्रायल ऑप्टिमाइजेशन पर काम करेंगे। वैश्विक टेक कंपनियों और स्टार्टअप्स के साथ साझेदारी से अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत की बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों का सटीक जवाब है। 140 करोड़ आबादी के साथ कुशल अनुसंधान महामारी और पुरानी बीमारियों से निपटने के लिए जरूरी है। प्रारंभिक परीक्षणों में एआई ने निदान त्रुटियों को 30 प्रतिशत तक कम किया है।
डेटा गोपनीयता और कुशल पेशेवरों की कमी जैसी चुनौतियां हैं, लेकिन प्रशिक्षण कार्यक्रमों से इन्हें दूर किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां सर्वोत्तम प्रथाओं को लाएंगी।
डिजिटल स्वास्थ्य में वैश्विक नेतृत्व के लिए यह कदम महत्वपूर्ण है। अधिकारी ने आशावादी स्वर में कहा, ‘एआई हमारे वैज्ञानिकों को लाखों जिंदगियां बचाने में सक्षम बनाएगा।’