
एक नई रिपोर्ट के अनुसार, 2026 तक भारत के 90 प्रतिशत से ज्यादा पेशेवर नौकरी तलाशने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग करेंगे। यह बदलाव नौकरी बाजार में एआई की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है, जहां युवा कार्यबल तकनीक से लैस होकर प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ना चाहता है।
हजारों पेशेवरों पर आधारित इस सर्वेक्षण से पता चलता है कि वर्तमान में 60 प्रतिशत लोग रिज्यूमे सुधारने और जॉब मैचिंग के लिए एआई आजमा रहे हैं। अगले दो वर्षों में यह आंकड़ा तेजी से बढ़ेगा, क्योंकि लिंक्डइन जैसी साइटें एआई फीचर्स को आसान बना रही हैं।
भारत की तकनीक-प्रेमी पीढ़ी इस ट्रेंड को बढ़ावा दे रही है। महामारी के बाद बेरोजगारी की चिंताओं के बीच, एआई व्यक्तिगत सलाह देकर मदद कर रहा है। स्किल गैप विश्लेषण से लेकर इंटरव्यू सिमुलेशन तक, ये टूल्स अनिवार्य हो चुके हैं।
हालांकि, गोपनीयता और पूर्वाग्रह की समस्याएं बाधा बन सकती हैं। रिपोर्ट नैतिक एआई विकास पर जोर देती है, ताकि विविध भारतीय बाजार में निष्पक्षता बनी रहे।
कंपनियां भी एआई से भर्ती कर रही हैं, इसलिए पेशेवरों को अपस्किलिंग जरूरी है। 2026 तक एआई न इस्तेमाल करने का मतलब पिछड़ जाना होगा। यह रिपोर्ट करियर की नई शुरुआत का संकेत देती है।