
नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 86 प्रतिशत भारतीयों के लिए ज्वेलरी उनकी सबसे महत्वपूर्ण संपत्ति बनी हुई है। लेकिन युवा पीढ़ी इस परंपरा में तेजी से बदलाव ला रही है और आधुनिक ट्रेंड को अपना रही है।
सोना और हीरे की ज्वेलरी सदियों से धन संरक्षण का प्रतीक रही है। परिवार इसे पीढ़ी-दर-पीढ़ी संभालते हैं और मुश्किल वक्त में बेचकर पैसे जुटाते हैं। ग्रामीण इलाकों में यह अभी भी प्रमुख साधन है।
हालांकि, मिलेनियल्स और जेन जेड हल्के डिजाइन, लैब-ग्रोन डायमंड्स और सस्टेनेबल ज्वेलरी की ओर रुख कर रहे हैं। ई-कॉमर्स साइट्स पर 35 वर्ष से कम उम्र वालों की खरीदारी में 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक फैशन, सोशल मीडिया और व्यक्तिगत पसंद इस बदलाव के पीछे हैं। ज्वेलरी अब सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि स्टाइल स्टेटमेंट भी बन गई है।
भारतीय ज्वेलरी बाजार 15 प्रतिशत सालाना बढ़ रहा है। यह परंपरा और नवीनता का अनोखा मेल भविष्य के लिए सुनहरा अवसर पैदा कर रहा है।