
लखनऊ: कथक के महान आचार्य पंडित बिरजू महाराज की पहली पुण्यतिथि पर उत्तर प्रदेश की राजनीतिक और सांस्कृतिक दुनिया ने उन्हें याद किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि बिरजू महाराज जी उत्तर प्रदेश का गौरव थे।
लखनऊ घराने के इस महान कलाकार का निधन 15 जनवरी 2022 को हुआ था। उनकी चाल, अदा और भावों ने पूरी दुनिया को मंत्रमुग्ध कर दिया था। सीएम योगी ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘उनके नृत्य में भारतीय संस्कृति की आत्मा झलकती थी।’
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा, ‘बिरजू महाराज कथक के सच्चे साधक थे। उनकी ताल और लय आज भी गूंजती है।’ राज्य भर में कार्यक्रम आयोजित हुए जहां उनके शिष्यों ने प्रस्तुतियां दीं।
पंडित बिरजू महाराज का जन्म कलका-बिंदा महाराज परिवार में हुआ था। उनके पिता जगन्नाथ महाराज और चाचा आचान महाराज व शम्बू महाराज से उन्हें प्रशिक्षण मिला। मात्र 13 वर्ष की आयु में वे मंच पर आ गए।
उनकी रचनात्मक प्रतिभा अद्वितीय थी। ‘रासलीला’, ‘तारा तरंग’ जैसी रचनाओं ने कथक को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। पद्मविभूषण से सम्मानित यह कलाकार बॉलीवुड में भी छाए रहे। ‘मुगल-ए-आजम’, ‘देवदास’ जैसी फिल्मों में उनके नृत्य अविस्मरणीय हैं।
आज के कार्यक्रमों में दुर्लभ वीडियो और तस्वीरें दिखाई गईं। कथक केंद्र दिल्ली में विशेष प्रदर्शन हुए। उत्तर प्रदेश सरकार ने कथक को बढ़ावा देने के लिए नई योजनाओं की घोषणा की।
बिरजू महाराज का योगदान सिर्फ नृत्य तक सीमित नहीं था। वे संगीतकार, गायक और कोरियोग्राफर भी थे। उनकी थुमरियां और तराने आज भी सिखाए जाते हैं।
इस पुण्यतिथि ने एक बार फिर यह एहसास दिलाया कि शास्त्रीय कलाओं को संरक्षित करना हमारा कर्तव्य है। उनके चरणों की थाप आज भी हर कथक साधक के हृदय में गूंजती है।
