
उत्तर प्रदेश में गरीबी उन्मूलन के संकल्प को साकार करने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। जीरो पावर्टी अभियान को नई गति देने के लिए अब राज्य की यूनिवर्सिटीज और कॉलेज आगे आ रहे हैं। इस पहल से शैक्षणिक संस्थानों की विशेषज्ञता और युवा ऊर्जा का उपयोग कर लाखों गरीब परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा।
लखनऊ में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री योगी ने निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले में यूनिवर्सिटी के नेतृत्व में सर्वेक्षण कराया जाए। इन संस्थानों को गांव-गांव जाकर गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों की पहचान करनी होगी। उसके बाद उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का दायित्व सौंपा गया है।
शिक्षा मंत्री डॉ. योगेंद्र उपाध्याय ने कहा, ‘हमारे विश्वविद्यालय सामाजिक परिवर्तन के स्रोत बनेंगे।’ बीएचयू, लखनऊ यूनिवर्सिटी समेत 50 से अधिक संस्थानों ने अभियान में भाग लेने का संकल्प लिया है। छात्र स्वयंसेवक घर-घर पहुंचकर डेटा संग्रह करेंगे और कौशल विकास कार्यक्रम चलाएंगे।
पायलट प्रोजेक्ट में वाराणसी और लखनऊ में 10 हजार से अधिक परिवार लाभान्वित हो चुके हैं। हालांकि, कुछ आलोचक संस्थानों पर अतिरिक्त बोझ की बात कह रहे हैं, लेकिन सरकार का मानना है कि यह युवाओं में सामाजिक जिम्मेदारी का भाव जागृत करेगा। राज्य स्तर पर डैशबोर्ड से प्रगति की निगरानी होगी।
यह अभियान न केवल गरीबी मिटाएगा बल्कि उत्तर प्रदेश को एक समृद्ध और समावेशी राज्य बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। आने वाले दिनों में इसके व्यापक परिणाम सामने आएंगे।