
उत्तर प्रदेश में कौशल विकास की नई क्रांति शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने एमएसएमई और बड़े उद्योगों के लिए शिक्षुता योजना में आकर्षक प्रतिपूर्ति की सुविधा शुरू की है। इस योजना से युवाओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा और उद्योगों को कुशल श्रमिक।
योजना के तहत शिक्षुओं को दिए जाने वाले वेतन की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति मिलेगी। छोटे-मध्यम उद्यमों के लिए यह वरदान साबित होगी, जहां प्रशिक्षण खर्च हमेशा बाधा बनता रहा है।
उत्तर प्रदेश में 60 लाख से अधिक एमएसएमई हैं, जो करोड़ों लोगों को रोजगार देते हैं। लेकिन कुशल श्रमिकों की कमी से विकास रुक रहा था। अब यह योजना लाखों युवाओं को उद्योगों के द्वार खोलेगी।
बड़े उद्योगों के लिए 15 प्रतिशत शिक्षु आरक्षण अनिवार्य होगा। आईटीआई और पॉलिटेक्निक से प्रशिक्षुओं की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
प्रारंभिक आंकड़े उत्साहजनक हैं। नोएडा के एक इलेक्ट्रॉनिक्स कारखाने ने 50 शिक्षु रखे। प्रबंधक ने कहा, ‘प्रतिपूर्ति से हमें जोखिम नहीं उठाना पड़ा।’
डिजिटल पोर्टल से आवेदन आसान। पारदर्शिता के लिए आधार लिंकिंग अनिवार्य। जागरूकता अभियान से ग्रामीण क्षेत्रों तक योजना पहुंचेगी।
योगी सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है- आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश। यह योजना न केवल रोजगार बढ़ाएगी, बल्कि राज्य को स्किल हब बनाएगी। युवा ऊर्जा अब उद्योगों की ताकत बनेगी।