
लखनऊ। 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लोकतंत्र की आत्मा विधायिका में बसती है। यही न्याय, समानता और संप्रभुता का मूल आधार है। उन्होंने इस सम्मेलन को लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने वाले मंच के रूप में सराहा।
तीन दिनों तक चली इस बैठक में देश भर के पीठासीन अधिकारियों ने विचार-विमर्श किया और विकसित भारत-2047 के लिए छह प्रमुख संकल्प लिए गए। सीएम योगी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा उपसभापति हरिवंश का आभार जताया।
उन्होंने कहा कि विधायिका ही न्याय का मार्ग प्रशस्त करती है। सरकारी योजनाओं को सशक्त समाज निर्माण का माध्यम बनाना भी इसी का कार्य है। सहमति-असहमति के बीच संवाद से संप्रभुता का उदाहरण प्रस्तुत होता है। भारत को लोकतंत्र की सर्वोच्च परंपरा पर गर्व है।
प्रधानमंत्री द्वारा भारत को लोकतंत्र की जननी बताए जाने का जिक्र करते हुए योगी ने पंच-पारंपरिक विरासत का उल्लेख किया। विविधता के बावजूद देश एक भाव से जुड़ा है। अपने पांच लोकसभा कार्यकालों के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने सदन संचालन की बारीकियां बताईं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में प्रश्नकाल में सुधार से अब 20 सदस्य 20 प्रश्न उठा पाते हैं। अंतिम व्यक्ति की आवाज भी यहां गूंजती है। सम्मेलन के संकल्प विकसित भारत के अनुरूप हैं।
विधानसभा-परिषद में विकसित भारत-विकसित यूपी पर 377 विधायकों ने रात्रि जागरण कर सुझाव दिए। 500 जनप्रतिनिधियों व बुद्धिजीवियों ने 75 जिलों में भ्रमण कर 98 लाख सुझाव जुटाए, जिन्हें आईआईटी कानपुर ने परिष्कृत किया।
पेपरलेस बजट व डिजिटल प्रक्रिया से पर्यावरण संरक्षण हुआ। विधायकों का प्रशिक्षण प्राथमिकता है। सालाना 30 दिन सदन चले, यूपी में बिना लंच ब्रेक देर रात तक बैठकें होती हैं।
राष्ट्रीय मुद्दों पर समितियां बनती हैं, संविधान दिवस पर चर्चाएं होती हैं। योगी ने सभी संकल्पों को यूपी में लागू करने का भरोसा दिया। यह सम्मेलन सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान का केंद्र है।