
प्रख्यात लेखकों और विचारकों ने एक महत्वपूर्ण साहित्यिक मंच पर तकनीक, ज्ञान की खोज और राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य पर गहन विचार-विमर्श किया। इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने आधुनिक तकनीकी प्रगति के ज्ञान सृजन और प्रसार पर प्रभाव की बारीकियां उजागर कीं।
चर्चा में तकनीक को दोधारी तलवार बताया गया। एक ओर डिजिटल प्लेटफॉर्म ने सूचना को लोकतांत्रिक बनाया है, जिससे ग्रामीण लेखक वैश्विक मंच प्राप्त कर रहे हैं। वहीं, शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट ने गहन पठन की संस्कृति को प्रभावित किया है।
एआई युग में ज्ञान खोज पर विशेष ध्यान केंद्रित रहा। विशेषज्ञों ने व्यक्तिगत लर्निंग पथों की सराहना की, लेकिन इको चैंबर की चेतावनी दी। शिक्षा में प्राचीन ज्ञान और आधुनिक तकनीक के संकर मॉडल की वकालत की गई।
राष्ट्रीय दृष्टिकोण पर बहस में आत्मनिर्भर भारत को तकनीकी स्वावलंबन से जोड़ा गया। स्वदेशी एआई से लेकर सांस्कृतिक कथाओं की रक्षा तक, तकनीक को राष्ट्रीय भावना का सेवक बनाने पर जोर दिया गया।
समापन में सहमति बनी कि तकनीक का विवेकपूर्ण उपयोग राष्ट्रीय पहचान को मजबूत करेगा। यह आयोजन आगे के संवादों के लिए प्रेरणा स्रोत सिद्ध हुआ।