
महिला अधिकारों की पैरवी करने वाली प्रमुख कार्यकर्ता वृंदा आदिगे ने हुबली पुलिस की कथित बर्बरता को संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि महिलाओं की सुरक्षा कोई विलासिता नहीं, बल्कि संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकार है। यह बयान एक महिला के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा की गई कथित मारपीट के बाद सामने आया है, जिसने पूरे राज्य में हड़कंप मचा दिया है।
घटना तब घटी जब एक महिला पारिवारिक विवाद को सुलझाने के लिए थाने पहुंची। वहां के पुलिसकर्मियों ने उसके साथ दुर्व्यवहार किया, गाली-गलौज की और शारीरिक हिंसा का सहारा लिया। वृंदा आदिगे ने पत्रकारों से बातचीत में इसे ‘पुलिस की मनमानी और महिलाओं के प्रति असंवेदनशीलता’ का प्रतीक बताया। उन्होंने अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा कि जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार महिलाओं को पूर्ण सुरक्षा का आश्वासन देता है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो इस घटना के गवाह बन गए हैं, जिसमें पुलिस की गुंडागर्दी साफ नजर आ रही है। आदिगे ने प्रभावित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है, साथ ही स्वतंत्र जांच समिति गठित करने का आग्रह किया। महिला संगठनों ने थाने के बाहर धरना शुरू कर दिया है।
राज्य सरकार पर दबाव बढ़ रहा है, जबकि विपक्ष ने इसे कानून-व्यवस्था की विफलता करार दिया। हुबली पुलिस ने आंतरिक जांच का भरोसा दिलाया है, लेकिन कार्यकर्ताओं का विश्वास कम है। यह मामला पुलिस सुधारों की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
वृंदा आदिगे ने चेतावनी दी कि यदि ऐसी घटनाओं पर लगाम नहीं लगाई गई, तो महिलाओं का पुलिस पर भरोसा पूरी तरह टूट जाएगा। आने वाले दिनों में इसकी जांच पर सबकी नजरें टिकी हैं।