
नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने महिला नेतृत्व वाले विकास को केंद्र सरकार की नीतियों का मूल आधार बताया है। एक महत्वपूर्ण समारोह में बोलते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाना न केवल सामाजिक जरूरत है बल्कि आर्थिक प्रगति का मजबूत इंजन भी है। यह दृष्टिकोण भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में तेजी से आगे ले जा रहा है।
पुरी ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना जैसी प्रमुख योजनाओं का जिक्र किया, जिन्होंने महिला साक्षरता और कार्यबल भागीदारी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। उन्होंने ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों की सफल कहानियों का उदाहरण देते हुए कहा कि जब महिलाएं आगे बढ़ती हैं तो विकास की गति दोगुनी हो जाती है।
मोदी सरकार के तहत स्टैंड अप इंडिया और मुद्रा योजना के माध्यम से महिल उद्यमियों को अरबों रुपये के ऋण वितरित किए गए हैं। पिछले पांच वर्षों में महिला स्वामित्व वाली उद्यमों में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसका श्रेय नीतिगत सुधारों को जाता है।
भविष्य की योजनाओं में महिलाओं को नवीकरणीय ऊर्जा और डिजिटल प्रौद्योगिकी जैसे उन्नत क्षेत्रों में शामिल करने पर जोर दिया गया। पुरी ने महिला-केंद्रित कौशल विकास कार्यक्रमों की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि वे भारत के हरित क्रांति और तकनीकी उछाल का नेतृत्व करें।
ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यान्वयन की चुनौतियों का जिक्र करते हुए पुरी ने शिक्षा और स्वास्थ्य में लैंगिक असमानताओं में कमी के आंकड़े पेश किए। महिला नेतृत्व को नीतियों के हर धागे में बुना जाना ही समावेशी विकास का आधार है।
